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अपनी इस बेटी को... निकाल लो सारा दूध और भर दो अपनी गर्मी से!"

बापू... ये तो बहुत बड़ा है... ये मेरे अंदर घुसना चाहता है... अहहहहह, मत रुको!"

देख लिया? तेरा बाप ही तुझे तेरी सुहागरात का असली स्वाद चखा रहा है!

आह्ह्ह... डैडी! थोड़ा धीरे... अब मैं अकेली नहीं हूँ

आह्ह्ह... सोमैया! तेरा ये बदन.

वाह सोफिया... तेरी जवानी तो अभी से रस टपका रही है। इसे ज़ाया नहीं होने दूँगा।

लैला के जिस्म का बँटवारा खत्म! इसकी चूत (किट्टी) और इसकी गांड़ (Ass) पर सिर्फ और सिर्फ मेरे लोहे जैसे रोड,आह्ह्ह! अब्बा... नहीं

मुझे तो इस जवानी का दूध पीना है।

यह जगह इतनी तंग और कसी हुई क्यों लग रही है? मेरा अंग तो इसके आगे जा ही नहीं पा रहा!"

मुझे लगता है कि अगर मैं इसे तुम्हारी इस तंग और रसीली योनि के भीतर उतार दूँ और वहीं रहने दूँ

"हाँ... पापा... अह्ह्ह... और... बहुत तेज क्रेविंग हो रही है...

"अह्ह्ह... पापा... उमम्म... जो आप चाहेंगे, वही होगा..." माया

जो आपका हुक्म... यह कोख... सिर्फ आपकी सत्ता की निशानी को पालेगी..."
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