मायके की देहली पर कदम रखते ही माया को एक अजीब सा सुकून मिला। २० साल की माया, जो अब तीन महीने की गर्भवती थी, अपने जीवन के एक बेहद नाजुक और खूबसूरत पड़ाव पर थी। ससुराल की बंदिशों और जिम्मेदारियों से दूर, उसे कुछ समय के लिए अपने मायके की खुली हवा और अपनों के लाड-प्यार की सख्त जरूरत थी।
उसके मायके का परिवार छोटा और सीधा-साधा था। घर में उसके पिता, जो हमेशा उसकी ढाल बनकर रहे, बड़ा भाई अमित, उसकी बड़ी भाभी सुधा, और सबसे छोटा भाई राहुल थे। मां के जाने के बाद सुधा भाभी ने ही इस घर को संभाला था और माया के लिए वह सिर्फ भाभी नहीं, बल्कि एक दोस्त और मां जैसी थीं।






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