2 Chapters



Chapter 1

Chapter 2

Chapter 3

Chapter 4

चलो अनन्या, अब हमारी असली जंग शुरू होने वाली है।

जनरल... मुझे माफ कर दो! हम तो सिर्फ हुक्म मान रहे थे!"

हाँ! वही हैं! और उनके साथ राजकुमारी अनन्या भी है

क्या तुम मेरी अर्धांगिनी बनोगी?"

मेरी जिंदगी अब मुकम्मल हो चुकी है।"

सिर्फ हमारा यह सफर और हमारा यह आशियाना।"

इतनी सुबह-सुबह इस बगीचे में अकेली क्या सोच रही हो, महारानी?"

राजकुमारी अनन्या, आपकी बुद्धिमत्ता के बिना यह जीत असंभव थी।"

"इसमें क्या हो सकता है?"

यह दुनिया पूरी तरह से बेरहम हो चुकी है।"

अनन्या... जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ,

Happy ending
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