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शाम ढलते ही राजधानी के मुख्य उत्सव हॉल में दीपों की रोशनी से जगमगाहट फैल गई। शहर के कोने-कोने से आए कलाकर, संगीतकार और गणमान्य अतिथि इस विशेष शाम का हिस्सा बनने के लिए एकत्र हुए थे। आज का यह आयोजन किसी राजनीतिक संधि या युद्ध की विजय का नहीं, बल्कि साम्राज्य में शांति और खुशहाली लौटने की खुशी में रखा गया था।








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