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सुबह की ठंडी हवा गुफा के मुँह से अंदर आ रही थी, जिससे आग की राख लगभग ठंडी हो चुकी थी। रिया की आँखें खुलीं तो उसने देखा कि रुद्रदेव पहले से ही जागा हुआ था। वह गुफा के मुँह पर खड़ा होकर बाहर के बर्फीले रास्तों को बहुत गौर से देख रहा था। उसके हाथ में उसकी पुरानी तलवार थी, जिसकी धार को वह एक पत्थर से रगड़कर और भी तेज कर रहा था।








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