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रात की चादर पूरी राजधानी पर धीरे-धीरे उतर चुकी थी। आसमान में चाँद अपनी पूरी शीतलता के साथ चमक रहा था और उसकी चाँदनी राजमहल के संगमरमर के आँगन पर दूधिया रोशनी बिखेर रही थी। ठंडी हवा के झोंके जब महलों की खिड़कियों से गुजरते थे, तो चमेली और मोगरा की भीनी-भीनी खुशबू पूरे वातावरण में घुल जाती थी।








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