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तहखाने की ठंडी हवा में जलती हुई मशाल की परछाइयाँ दीवारों पर अजीब आकृतियाँ बना रही थीं। बाहर गलियारे में शाही सैनिकों के भारी जूतों की आवाजें गूँज रही थीं, जो हर कोने की बारीकी से तलाशी ले रहे थे।

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