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शाम के ढलते सूरज ने आसमान को नारंगी और सुनहरे रंगों में रंग दिया था। महल की विशाल खिड़कियों से छनकर आती यह रोशनी अंदर के संगमरमर के फर्श पर एक अजीब सा जादुई आवरण बना रही थी। मुख्य हॉल में सन्नाटा था, लेकिन उस सन्नाटे में एक अजीब सा सुकून और ठहराव था, जो महीनों की उथल-पुथल के बाद नसीब हुआ था।








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