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मुख्य दरबार के विशाल हॉल में चारों तरफ चकाचौंध रोशनी फैल रही थी। संगमरमर के खंभों पर फूलों की मालाएँ सजाई गई थीं और वाद्य यंत्रों से निकलती धीमी और मधुर संगीत की धुन पूरे वातावरण को एक जादुई अहसास करा रही थी। साम्राज्य के सभी गणमान्य मंत्री, वरिष्ठ सेनापति और सम्मानित अतिथि अपनी-अपनी जगहों पर सुशोभित थे।








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