सदियों पुराने विशाल और घने जंगलों के सीने को चीरती हुई भोर की पहली किरण अभी धरती पर ठीक से उतरी भी नहीं थी। यह अरण्य इतना प्राचीन और रहस्यमयी था कि यहाँ के ऊँचे, गगनचुंबी पेड़ों की घनी शाखें आपस में मिलकर आसमान को पूरी तरह ढंक लेती थीं, जिससे दिन के उजाले में भी नीचे केवल एक डरावना और मद्धम धुंधलका पसरा रहता था। चारों तरफ केवल झींगुरों की तीव्र झंकार, जंगली हिंसक पशुओं की दूर से आती दहाड़ और सूखी पत्तियों पर सरसराते ज़हरीले साँपों की आवाजें गूंज रही थीं। यह प्रकृति का वह आदिम रूप था, जहाँ केवल ताकतवर का कानून चलता था।
इस खूंखार और अनंत फैले जंगल के ठीक मध्य हिस्से में बनी एक पथरीली पहाड़ी के दामन में आदिम मानवों का एक विशाल कबीला बसा हुआ था।






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