
शहर के सबसे बड़े कोचिंग सेंटर में लाला, जिसकी उम्र 55 साल थी, चौकीदारी का काम करता था। उसकी बेटी लैला, जो अभी महज़ 18-19 साल की थी, उसी सेंटर में पढ़ती भी थी और अपनी फीस भरने के लिए छुट्टी के बाद वहाँ के बाथरूम साफ़ करने का काम करती थी।
शाम के 7 बज चुके थे। सारे छात्र और टीचर्स जा चुके थे। कोचिंग की बड़ी सी बिल्डिंग में अब सिर्फ बाप और बेटी अकेले थे। लैला ऊपर की मंज़िल पर लड़कियों का बाथरूम साफ़ कर रही थी। उसने अपनी सलवार घुटनों तक ऊपर चढ़ा रखी थी ताकि वह गीली न हो, और उसकी सफ़ेद कमीज़ पसीने से भीगकर उसके बदन से चिपक गई थी।






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