
हवेली के गलियारे में सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन मीरा के कानों में अपने सौतेले पिता और माँ के कमरे से आती दबी-कुचली आहें और बेड की चरचराहट साफ सुनाई दे रही थी। वह बाथरूम जाने के लिए निकली थी, लेकिन उन आवाजों ने उसके कदमों को ठिठकने पर मजबूर कर दिया। मीरा जानती थी कि भीतर वासना का खेल चल रहा है, और यही वह मौका था जिसका वह इंतज़ार कर रही थी।
अचानक उसे बगल वाले कमरे से अपनी दादी के कराहने की आवाज़ आई। वह तेज़ी से उनके कमरे में दाखिल हुई और देखा कि बूढ़ी दादी अपने पैरों के दर्द से तड़प रही थीं। मीरा के शातिर दिमाग में तुरंत एक बिजली जैसा आइडिया कौंधा। उसने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए वहीं से गले फाड़कर शोर मचाना शुरू कर दिया, "मम्मी! ओ मम्मी! जल्दी आओ... देखो दादी माँ को क्या हो गया! उनकी तबीयत बहुत खराब है!"






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