निशा की शादी मध्य प्रदेश के एक परिवार से तय हुई थी। शादी की सारी रस्में और धूमधाम पूरी होने के बाद, वह विदा होकर अपने ससुराल पहुँची, जो कि तमिलनाडु के एक हिस्से में स्थित 'पुष्पेन्द्र हवेली' के नाम से जानी जाती थी।
शादी के शुरुआती दिन नए माहौल, रीति-रिवाजों और नए लोगों के बीच घुलने-मिलने में बीते। लेकिन धीरे-धीरे उस प्राचीन हवेली के भव्य कमरों, लंबी गलियों और वहाँ के लोगों के बर्ताव में एक अजीब सा रहस्यमयी सन्नाटा महसूस होने लगा। पुष्पेन्द्र हवेली सिर्फ एक रिहायशी मकान नहीं थी, बल्कि उसके भीतर कई पुरानी बातें और परछाइयाँ छुपी थीं, जिनसे निशा अभी पूरी तरह अनजान थी। मध्य प्रदेश की संस्कृति से निकलकर दक्षिण भारत के इस विशाल और एकांत भवन में कदम रखने के बाद, उसकी जिंदगी का एक नया और अनचाहा अध्याय शुरू होने जा रहा था









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