घने जंगलों के बीच से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर रात के दो बजे सन्नाटा पसरा हुआ था। पूजा एक कॉलेज स्टूडेंट थी, जो अपनी आखिरी बस छूटने के कारण इस सुनसान मार्ग पर फंसी हुई थी। आखिरकार, एक पुरानी, मद्धम रोशनी वाली सरकारी बस आकर रुकी। पूजा राहत की सांस लेते हुए उसमें चढ़ गई, लेकिन जैसे ही वह अंदर पहुंची, उसका दिल बैठ गया। बस पूरी तरह खाली थी और ड्राइवर की सीट पर कोई नहीं था। अचानक बस के दरवाजे अपने आप खटाक से बंद हो गए और गाड़ी बिना किसी ड्राइवर के खुद-ब-खुद तेज रफ्तार से जंगल के कच्चे रास्तों पर दौड़ने लगी।
डर के मारे पूजा का बुरा हाल था। उमस और घबराहट के कारण उसका गोरा बदन पसीने से नहा चुका था। उसने एक टाइट शॉर्ट कुर्ती और लेगिंग्स पहन रखी थी, जो पसीने के कारण उसकी सुडौल कमर और भारी नितंबों से चिपक गई थी। तभी बस के पिछले हिस्से की खिड़कियां टूट गईं और घने अंधेरे में से तीन विशाल, खूंखार जंगली भेड़िये (Wolf-Beasts) खिड़कियों से कूदकर बस के अंदर दाखिल हो गए। इन आदिम जीवों की आंखें भूख और अत्यधिक उग्र काम-वासना के कारण खून की तरह लाल चमक रही थीं।








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