राजस्थान के बंजर इलाकों के बीचोबीच स्थित 'काली पहाड़ी की हवेली' के बारे में आसपास के गांवों में कई खौफनाक कहानियां मशहूर थीं। कहा जाता था कि सदियों पुरानी इस ढहती हुई हवेली के तहखाने में कुछ ऐसा रहता है जो इंसानी नहीं है। हवा यहाँ हमेशा ठंडी और सड़ी हुई गंध से भरी रहती थी। दीवारों पर जमी काली काई और चमगादड़ों की चीखें माहौल को किसी नरक जैसा डरावनी बनाती थीं।
मेघा एक पैरानॉर्मल इनवेस्टिगेटर (अदृश्य शक्तियों की खोज करने वाली) थी। वह अपने आधुनिक कैमरों और उपकरणों के साथ इस हवेली के सबसे गहरे तहखाने में अकेली उतरी थी। उमस और खौफ के कारण उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था। उसने केवल एक बेहद छोटी, काले रंग की कॉटन नाइटी पहन रखी थी, जो पसीने के कारण उसकी पतली कमर और सुडौल नितंबों से पूरी तरह चिपक गई थी।








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