अमेज़न के जंगलों के बीचोबीच बने एक अत्यधिक सुरक्षित हाइब्रिड अनुसंधान केंद्र में हवा पूरी तरह से ठंडी और आर्द्र थी। काँच की मोटी दीवारों के पार केवल घने पेड़ों की परछाइयाँ और रहस्यमयी सन्नाटा दिखाई दे रहा था। इस केंद्र के सबसे भीतरी और प्रतिबंधित हिस्से में एक विशेष कृत्रिम अभयारण्य बनाया गया था, जहाँ भारी लोहे की जालीदार दीवारें और कंक्रीट का फर्श था। कमरे के भीतर केवल नीली और मद्धम हरी लाइटें जल रही थीं, जो माहौल को और भी अधिक गंभीर और डरावना बना रही थीं।
वहाँ दो विशाल, नर गोरिल्ला—केंजो और ब्रूटस—रखे गए थे। इन दोनों का वजन लगभग तीन सौ किलोग्राम था, और उनके चौड़े कंधे, काले चमकदार घने बाल और इंसानी चेहरे जैसी डरावनी बनावट किसी को भी कँपा देने के लिए काफी थी। वैज्ञानिक प्रयोग के तहत, उन्हें एक अत्यधिक शक्तिशाली न्यूरो-केमिकल और कामोत्तेजक हार्मोन का भारी डोज दिया गया था, जिसने उनकी सामान्य बुद्धि को पूरी तरह से दबाकर उनके भीतर की आदिम, हिंसक काम-वासना को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया था। वे दोनों लगातार अपने भारी हाथों से छाती पीट रहे थे और उनकी गहरी, गूँजती हुई गुर्राहट कंक्रीट की दीवारों से टकराकर वापस आ रही थी।








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