तबेले के भीतर की हवा बेहद भारी और उमस से भरी हुई थी। बाहर तेज धूप झुलसा रही थी, लेकिन टीन की लंबी छत के नीचे एक अजीब सा अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। हवा में गोबर, गीली मिट्टी और जानवरों के जिस्म की एक तीखी, आदिम गंध घुली हुई थी। इसी सन्नाटे के बीच केवल एक ही आवाज गूंज रही थी—छह विशाल, काले और खूंखार भैंसों की भारी-भारी सांसें। उनके बड़े-बड़े सींग मद्धम रोशनी में चमक रहे थे और उनकी आँखों में एक अजीब सी जंगली बेचैनी तैर रही थी।
तबेले के ठीक बीचोबीच खड़ी थी मोहिनी। मोहिनी का बदन इस वक्त पसीने की बारीक बूंदों से पूरी तरह भीगा हुआ था, जिससे उसका गेहूंआ जिस्म और भी ज्यादा चमकदार और आकर्षक लग रहा था। उसने केवल एक ढीली सी सूती साड़ी पहन रखी थी, जो पसीने के कारण उसके बदन के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह चिपक गई थी। उसके उभरे हुए स्तनों (boobs) की गोलाई साड़ी के पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रही थी।








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