
रीना उस समय सुख और मदहोशी के एक ऐसे चरम सागर में गोते खा रही थी, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। टॉमी के हर एक भारी और गहरे झटके के साथ उसके बदन में आनंद की ऐसी लहरें उठ रही थीं, जो उसने अपनी पूरी जिंदगी में पहले कभी महसूस नहीं की थीं। इंसानी छुअन से कोसों दूर, यह एक बिल्कुल अलग, आदिम और बेकाबू कर देने वाला चरम सुख था।
"ओह्ह्ह... टॉमी..." रीना ने अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं, और उसका पूरा वजूद सिर्फ उस तीव्र कँपकँपी को महसूस कर रहा था। उसकी जाँघें टॉमी की मजबूत पीठ पर और कसती जा रही थीं। इस अद्भुत और जादुई अहसास ने उसके दिमाग के सोचने-समझने के हर हिस्से को पूरी तरह सुन्न कर दिया था।






Write a comment ...