
नूर की इस चुनौती ने रणधीर के अंदर के सोए हुए शिकारी को पूरी तरह जगा दिया था। जैसे ही नूर ने उसे काबू करने की कोशिश की, रणधीर ने अपनी ताकत का एक खौफनाक प्रदर्शन किया। उसने नूर की कलाइयों को लोहे जैसी पकड़ में जकड़ा और एक ही झटके में उसे पलटकर पेट के बल (On her stomach) घास पर लेटा दिया।
नूर का चेहरा अब गीली मिट्टी और घास के करीब था, और उसका भीगा हुआ भारी लहंगा उसकी पीठ तक सिमट चुका था। रणधीर अब उसके पीछे एक भूखे भेड़िये की तरह सवार था। उसने नूर की गर्दन के पिछले हिस्से पर अपने दांत गड़ा दिए, जिससे नूर के मुंह से एक सिसकी और कराह एक साथ निकली।






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