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अनन्या की आँखों में बेबसी, पागलपन और खौफ का मिला-जुला तूफान उठ रहा था। दीवारों से बंधी भारी लोहे की जंजीरें उसके हिलने पर छनछना रही थीं। माया उसके पास पहुँची, उसकी आँखों में न अब कोई डर था और न ही कोई लाचारी। माया ने बिना एक पल की देरी किए अपनी पूरी ताकत समेटकर अनन्या के चेहरे पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया!








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