
Comment Polo chapter ke new update ke liye
विक्रम ने अपने दोनों हाथों से माया की दोनों कलाइयों को बेड के हेडबोर्ड से ज़ोर से सटाकर बांध सा दिया था। उसका चौड़ा, सख्त और पसीने से लथपथ सीना माया के उभारों को बुरी तरह से भींच रहा था। खिड़की से आती बिजली की कौंध में विक्रम के चेहरे का वो वहशीपन और भी गहरा दिख रहा था। माया की सांसें तेज़-तेज़ चल रही थीं, उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। उसके दिल में नफरत का ज़हर उबल रहा था, लेकिन जिस्म दो-दो मदमस्त मर्दों के दबाव में बेबस हो चुका था।








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