
बारिश की बूंदों और खेत की मिट्टी में लथपथ आरती और उसके पिता जब घर की दहलीज पर पहुँचे, तो माहौल में एक अजीब सी भारी खामोशी थी। आरती की काली फ्रॉक जगह-जगह से कीचड़ में सनी थी और उसके बाल पूरी तरह बिखरे हुए थे। उसके चेहरे पर जो संतुष्टि की चमक थी, वह किसी से छिपी नहीं थी।
जैसे ही वे आंगन में आए, दादू और ताऊजी बरामदे में ही बैठे हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। आरती की माँ किचन से बाहर निकली और उनकी हालत देखकर चौंक गई।






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