
आरती बाथरूम में खुद को अच्छी तरह साफ करने के बाद, अपनी जांघों के बीच की उस अनजानी सी टीस और ताऊजी के गाढ़े रस की यादों को समेटकर बाहर आई। उसने एक ढीला-ढाला सूट पहना, लेकिन उसकी चाल में एक हल्का सा भारीपन और आँखों में एक अलग ही चमक थी।
जब वह डाइनिंग टेबल पर पहुँची, तो उसकी माँ, दादू और ताऊजी पहले से ही वहां मौजूद थे। ताऊजी बड़े सुकून से अखबार पढ़ रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो, जबकि दादू की अनुभवी नज़रें आरती के चेहरे को पढ़ रही थीं।






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