
गौशाला के भीतर का मंजर अब वासना से बदलकर वीभत्स खौफ में तब्दील हो चुका था। काका ससुर अपनी ही बेटी काव्या को लहूलुहान और अर्धनग्न हालत में देखकर पत्थर बन चुके थे। उनके हाथ-पैर कांप रहे थे। तभी रंजीत ने अपना गंडासा ज़मीन पर पटका, जिसकी गूँज ने सन्नाटा चीर दिया।
काका ससुर ने फटी आँखों से मयूरी की ओर देखा और दहाड़े, "मयूरी! तू... तुझे ये सब पहले ही पता था! तूने जानबूझकर हमें नहीं रोका! तूने अपनी ही बहन जैसी लड़की की इज़्ज़त का सौदा कर दिया!"






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