
मयूरी ने रंजीत की आँखों में गहराई से झांका और अपना कोमल, गीला हाथ धीरे से उसकी धोती के भीतर डाल दिया। जैसे ही उसकी उंगलियों ने रंजीत की सख्त और गर्म रॉड (Rod) को छुआ, रंजीत के मुँह से एक दबी हुई कराह निकली। वह रॉड नशे और उत्तेजना के मारे पत्थर जैसी सख्त हो चुकी थी। मयूरी ने उसे अपनी मुट्ठी में भरा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सहलाना शुरू किया।
"मयूरी... तू... तू पागल कर देगी मुझे," रंजीत ने लड़खड़ाती जुबान में कहा और मयूरी के बिखरे बालों को मुट्ठी में भर लिया।






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