
ससुर जी का वहशीपन अब किसी मर्यादा को नहीं पहचानता था। रसोई की तंग जगह में उन्होंने मयूरी को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया था। मयूरी स्लैब पर झुकी हुई सिसक रही थी, लेकिन ससुर जी का मन अभी भरा नहीं था। उन्होंने मयूरी के शरीर को एक झटके से घुमाया और उसके एक पैर को उठाकर अपने मज़बूत कंधे पर रख लिया।
इस स्थिति में मयूरी का निचला हिस्सा पूरी तरह से खुल गया और उसकी लाचारी चरम पर पहुँच गई। ससुर जी ने कोई रहम दिखाए बिना मयूरी की साड़ी को और ऊपर खींचा और उसे सीधा उसकी छाती (chest) के ऊपर लपेट दिया, जिससे मयूरी के स्तन और उसका पूरा पेट पूरी तरह निर्वस्त्र हो गए। मयूरी अपने हाथों से अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ससुर जी ने उसके दोनों हाथों को स्लैब पर ही दबा दिया।


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