
उस अजनबी का शरीर अभी भी मयूरी के ऊपर भारी पड़ा हुआ था, लेकिन जैसे ही उसका काम पूरा हुआ, उसने एक पल की भी देरी नहीं की। मयूरी अभी उस झटके और अपने भीतर महसूस हो रहे उस गरम सैलाब के अहसास से उबर भी नहीं पाई थी कि उसने महसूस किया कि वह भारी साया उसके ऊपर से हट गया है।
मयूरी ने कांपते हाथों से अपनी साड़ी नीचे करने की कोशिश की, लेकिन वह शख्स किसी साए की तरह फुर्ती से उठा और बिना एक शब्द बोले अंधेरे गलियारे की ओर भाग गया। कमरे का दरवाजा हल्का सा चरमराया और फिर सन्नाटा छा गया।


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