ससुर जी के चेहरे पर उस वक्त एक ऐसी मुस्कान थी जिसे देखकर मयूरी का खून जम गया। वह अपनी कुर्सी से धीरे से उठे और मयूरी के बिल्कुल करीब आकर खड़े हो गए। गलियारे की हल्की रोशनी में उनकी आँखों की चमक किसी भूखे भेड़िए जैसी लग रही थी।
मयूरी ने डर के मारे अपनी नजरें नीची कर लीं और कांपते हुए कहा, "बाबूजी... वो... जेठ जी ने कहा कि अब काम खत्म हो गया है, इसलिए मैं लौट आई।"


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